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सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• और डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के बीच अंतर
जब हृदय की मांसपेशियां सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¤à¥€ हैं तो इसे सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• के रूप में जाना जाता है, जबकि जब हृदय की मांसपेशियां शिथिल होती हैं तो इसे डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• के रूप में जाना जाता है। सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤² के समय रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª बढ़ जाता है, लेकिन डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤² के समय, रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª कम हो जाता है।
ये दो पà¥à¤°à¤•ार के रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª हैं, जो किसी के दिल की धड़कन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ होते हैं। हृदय वह अंग है जो सà¤à¥€ ऊतकों, अंगों और शरीर के अनà¥à¤¯ अंगों को ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ यà¥à¤•à¥à¤¤ रकà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है। रकà¥à¤¤ को पंप करने के लिठहृदय सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¤à¤¾ है और लगातार आराम करता है और इस पà¥à¤°à¤•ार शरीर को रकà¥à¤¤ की आपूरà¥à¤¤à¤¿ करता है, इसे हृदय चकà¥à¤° कहा जाता है। à¤à¤• हृदय चकà¥à¤° 0.8 सेकंड में पूरा हो जाता है और 75 बीट पà¥à¤°à¤¤à¤¿ मिनट औसत दिल की धड़कन की दर होती है।
यह चकà¥à¤° रकà¥à¤¤ में मौजूद चैंबरों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पूरा किया जाता है, जैसे कि à¤à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ और वेंटà¥à¤°à¤¿à¤•लà¥à¤¸, दो आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾ सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ में à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¥‡ हैं और रकà¥à¤¤ को वेंटà¥à¤°à¤¿à¤•लà¥à¤¸ में बाहर निकाल देते हैं, वेंटà¥à¤°à¤¿à¤•ल हृदय से रकà¥à¤¤ को बाहर à¤à¥‡à¤œà¤¨à¥‡ का अनà¥à¤¬à¤‚ध करता है। फिर से ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ रहित रकà¥à¤¤ हृदय के दाईं ओर से अंदर जाता है और फेफड़ों से ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करता है, और फिर फिर से ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ यà¥à¤•à¥à¤¤ रकà¥à¤¤ हृदय के बाईं ओर से पंप किया जाता है।
रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª का मापन सà¥à¤«à¤¿à¤—à¥à¤®à¥‹à¤®à¥ˆà¤¨à¥‹à¤®à¥€à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किया जाता है, लेकिन आजकल अधिक उनà¥à¤¨à¤¤ तकनीकें à¤à¥€ उपलबà¥à¤§ हैं। माप पारा के मिलीमीटर (मिमी à¤à¤šà¤œà¥€) में किया जाता है । उदाहरण के लिà¤, यदि आराम करने वाला रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª 120/80 मिमी à¤à¤šà¤œà¥€ है, तो पहला सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¤¾ है और दूसरा डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• को इंगित करता है, जबकि दो संखà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के बीच का अंतर 40 है जो नाड़ी का दबाव है ।
नाड़ी दबाव वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के हृदय की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के पूरà¥à¤µà¤¸à¥‚चक के रूप में कारà¥à¤¯ करता है, विशेष रूप से वृदà¥à¤§ लोगों के लिà¤à¥¤ मधà¥à¤®à¥‡à¤¹, उचà¥à¤š कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤², गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ की बीमारी वाले लोग आमतौर पर उचà¥à¤š जोखिम में होते हैं। दूसरे, जीवनशैली à¤à¥€ à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का जोखिम लेकर आती है। इसलिà¤, इस सामगà¥à¤°à¥€ में, हम उन पर सारांश के साथ दो पà¥à¤°à¤•ार के रकà¥à¤¤ दबावों को अलग करेंगे।
तà¥à¤²à¤¨à¤¾ चारà¥à¤Ÿ
तà¥à¤²à¤¨à¤¾ के लिठआधार पà¥à¤°à¤•à¥à¤‚चक रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª
अरà¥à¤¥
जब रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª सबसे अधिक होता है या जब दिल धड़कता है (हृदय की मांसपेशियां सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¤à¥€ हैं), तो सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• दबाव उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होता है।
जब रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª कम से कम होता है, तो इसे डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª कहा जाता है। धड़कनों के बीच या धड़कनों के बीच हृदय की मांसपेशियों को आराम देने पर डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• दबाव उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होता है, यह रकà¥à¤¤ को फिर से à¤à¤°à¤¨à¥‡ का समय है।
धमनियों के अंदर रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¥¤ नà¥à¤¯à¥‚नतम।
तब होता है सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• चरण तब होता है जब बाà¤à¤‚ वेंटà¥à¤°à¤¿à¤•ल सिकà¥à¤¡à¤¼ जाता है। डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• चरण तब होता है जब बाà¤à¤‚ वेंटà¥à¤°à¤¿à¤•ल को आराम मिलता है।
रकà¥à¤¤ वाहिकाà¤à¤‚
ठेके।
आराम से।
सामानà¥à¤¯ परिसर वयसà¥à¤•ों में 90-120 मिमी à¤à¤šà¤œà¥€; 100 मिमी à¤à¤šà¤œà¥€ (6-9 वरà¥à¤·); 95 मिमी à¤à¤šà¤œà¥€ (शिशà¥)। 60-80 मिमी à¤à¤šà¤œà¥€; 65 मिमी à¤à¤šà¤œà¥€ (6-9 वरà¥à¤·); 65 मिमी à¤à¤šà¤œà¥€ (शिशà¥)।
उमà¥à¤° के साथ बदलाव
बढ़ती है।
कम हो जाती है।
उतार चढ़ाव
महान काम के दौरान मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से उतार-चढ़ाव से गà¥à¤œà¤°à¤¤à¤¾ है, दिल के काम करने का बल।
कà¥à¤› उतार-चढ़ाव देखे जाते हैं, लेकिन जब डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• दबाव बढ़ता है, तो यह हृदय की विफलता के बारे में संकेत देता है।
रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª की रीडिंग
अधिक संखà¥à¤¯à¤¾ सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• रीडिंग है, और बढ़ती उमà¥à¤° के साथ निगरानी आवशà¥à¤¯à¤• है। कम संखà¥à¤¯à¤¾ डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• दबाव है, और छोटी उमà¥à¤° में निगरानी महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है।
सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª की परिà¤à¤¾à¤·à¤¾
हृदय की गतिविधि, जब यह धड़कता है, जो धमनियों के माधà¥à¤¯à¤® से शरीर के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ हिसà¥à¤¸à¥‡ में रकà¥à¤¤ को खारिज कर देता है, जिसके कारण रकà¥à¤¤ वाहिकाओं पर दबाव बनता है, इस दबाव या बल को सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª कहा जाता है।
सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª दो पà¥à¤°à¤•ार के होते हैं, जो उचà¥à¤š सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª और कम सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• दबाव होते हैं। उचà¥à¤š सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª तब होता है जब वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® कर रहा होता है, उचà¥à¤š तनाव में। इस समय दिल सामानà¥à¤¯ से अधिक मजबूती से धड़कता है और हृदय की मांसपेशियों का संकà¥à¤šà¤¨ बढ़ जाता है और इसलिठसिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• दबाव बढ़ जाता है।
कम सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के मामले में जहां दिल की धड़कन की दर सामानà¥à¤¯ से कम हो जाती है, इसे सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• हाइपोटेंशन कहा जाता है। इसके परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प चकà¥à¤•र आना, अंग विफलता आदि हो सकते हैं।
औसत सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª 120 मिमी à¤à¤šà¤œà¥€ से नीचे मापा जाता है। 120-129 के बीच की सीमा को फà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾ माना जाता है, जबकि 130-139 के बीच की सीमा को उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª या उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के चरण 1 के रूप में कहा जाता है, सबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ चरण 2 उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª है जो 140 पर है, जबकि 180 है अधिक उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª वाली अवसà¥à¤¥à¤¾ और तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° को बà¥à¤²à¤¾à¤¨à¤¾ चाहिà¤à¥¤
डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª की परिà¤à¤¾à¤·à¤¾
डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के मामले में, धमनियों के दिल की धड़कन के बीच बल दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ रकà¥à¤¤ को बाहर किया जाता है, यह समय है जब हृदय रकà¥à¤¤ को धमनियों में निषà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯ रूप से पंप कर रहा है।
सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• दबाव में हृदय के निलय को अनà¥à¤¬à¤‚ध मिलता है, लेकिन यहां डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• चरण में निलय पà¥à¤°à¥à¤· खà¥à¤¦ को आराम देते हैं और रकà¥à¤¤ से à¤à¤° जाते हैं। वेंटà¥à¤°à¤¿à¤•à¥à¤²à¤° छूट की अवधि को 'डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²' कहा जाता है।
सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• और डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के बीच महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ अंतर
नीचे दिठगठबिंदà¥à¤“ं से पता चलता है कि दोनों रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª à¤à¤• दूसरे से कैसे à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ हैं:
जब रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª सबसे अधिक होता है या जब हृदय धड़कता है (हृदय की मांसपेशियां सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¤à¥€ हैं), तो सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• दबाव उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होता है, जबकि जब रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª कम से कम होता है, तो इसे डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª कहा जाता है । डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• दबाव धड़कनों के बीच या धड़कनों के बीच हृदय की मांसपेशियों को आराम देने पर निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ होता है; यह रकà¥à¤¤ को फिर से à¤à¤°à¤¨à¥‡ का समय है।
सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• दबाव के समय धमनियों के अंदर रकà¥à¤¤ का दबाव अधिकतम होता है जबकि डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• के समय यह नà¥à¤¯à¥‚नतम होता है।
जब बाà¤à¤‚ वेंटà¥à¤°à¤¿à¤•ल और रकà¥à¤¤ वाहिकाओं को अनà¥à¤¬à¤‚धित किया जाता है, तो यह सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• चरण होता है, और जब बाà¤à¤‚ वेंटà¥à¤°à¤¿à¤•ल और रकà¥à¤¤ वाहिकाओं को आराम मिलता है, तो इसे डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• चरण कहा जाता है।
सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤² की सामानà¥à¤¯ सीमा वयसà¥à¤•ों में 90-120 मिमी à¤à¤šà¤œà¥€ है; 100 मिमी à¤à¤šà¤œà¥€ (6-9 वरà¥à¤·); 95 मिमी à¤à¤šà¤œà¥€ (शिशà¥à¤“ं), दूसरी ओर, 60-80 मिमी à¤à¤šà¤œà¥€; 65 मिमी à¤à¤šà¤œà¥€ (6-9 वरà¥à¤·); डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤² में 65 मिमी à¤à¤šà¤œà¥€ (शिशà¥) सामानà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ है।
बढ़ती उमà¥à¤° के साथ सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• दबाव बढ़ जाता है, जबकि डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• दबाव कम हो जाता है, और इसलिठउमà¥à¤° की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ के साथ समय पर दबाव की निगरानी करना उचित है।
सà¥à¤«à¤¿à¤—à¥à¤®à¥‹à¤®à¥ˆà¤¨à¥‹à¤®à¥€à¤Ÿà¤° की सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨ पर पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¿à¤¤ संखà¥à¤¯à¤¾à¤“ं को देखकर रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª की रीडिंग की जाà¤à¤š की जा सकती है, उचà¥à¤š संखà¥à¤¯à¤¾ सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• है, जबकि निमà¥à¤¨ संखà¥à¤¯à¤¾ डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• दबाव है।
निषà¥à¤•रà¥à¤·
उपरोकà¥à¤¤ लेख से हम कह सकते हैं कि जब हृदय की मांसपेशी शिथिल और सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¤à¥€ है, तो हम सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤² और डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤² का उपयोग करते हैं। उनके (सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤² और डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²) के बीच संतà¥à¤²à¤¨ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ और उसकी हृदय संबंधी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को मापता है। समय के साथ à¤à¤• चिकितà¥à¤¸à¤• को अपनी चिकितà¥à¤¸à¤¾ शरà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का पालन करने के लिठजाना चाहिà¤, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यदि इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ नजरअंदाज किया गया तो ये जीवन के लिठखतरा हो सकते हैं।
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